शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

डॉ. भगवत सहाय महाविद्यालय में विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण

ग्वालियर  । वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ी का भविष्य भी उज्ज्वल हो, इसी ध्येय के साथ सरकार शिक्षा सुविधाओं का विस्तार कर रही है। इसी भाव के साथ उप नगर ग्वालियर के अंतर्गत शिक्षण संस्थाओं को अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। यह बात ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने डॉ. भगवत सहाय शासकीय महाविद्यालय में विकास कार्यों के लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने महाविद्यालय में कुल 4 करोड़ 15 लाख रूपए की लागत से नवनिर्मित मुख्य प्रवेश द्वार, अत्याधुनिक विज्ञान भवन, कम्प्यूटर प्रयोगशाला एवं स्मार्ट क्लास का लोकार्पण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा जिला अध्यक्ष श्री जयप्रकाश राजौरिया ने की। 

ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर सहित अन्य अतिथियों ने शॉल-श्रीफल व पुष्पाहारों से डॉ. भगवत सहाय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर के श्रीवास्तव को सम्मानित किया। डॉ. श्रीवास्तव इसी माह 30 अगस्त को सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं। सभी अतिथियों ने डॉ. श्रीवास्तव के सेवाकाल को याद किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। 

तैराकी प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने किया शानदार प्रदर्शन

नगर निगम ने किया प्रतियोगिता का आयोजन 

ग्वालियर  ।  खिलाडी खेल भावना से खेलते हुये लक्ष्य को हासिल करें और अपने सर्वश्रेष्ठ खेल का प्रदर्शन करें। नगर निगम ग्वालियर द्वारा निरंतर खेलों को बढावा देने के लिए विभिन्न वर्गों की खेल प्रतियोगिताओं को आयोजन किया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि शहर से अधिक से अधिक प्रतिभावान खिलाड़ी देश एवं विश्व में ग्वालियर का नाम रोशन करें। उक्ताशय के विचार महापौर डॉ. शोभा सतीश सिंह सिकरवार ने राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में नगर निगम द्वारा आयोजित जिला स्तरीय तैराकी प्रतियोगिता के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए। 

कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा खिलाड़ियों व जिला तैराकी संघ के तकनीकी सदस्यों का परिचय प्राप्त किया तदोपरान्त रंगीन गुब्बारे छोड़कर प्रतियोगिता का शुभारम्भ किया तथा इस अवसर पर विजयी खिलाड़ियों को मेडल सर्टिफिकेट व पुरस्कार देकर पुरस्कृत किया। नगर निगम, ग्वालियर एवं जिला तैराकी टीम के मध्य मैत्रीपूर्ण वाटरपोलो का मैच भी खेला गया जिसमें नगर निगम, ग्वालियर 2-1 से विजयी रही। प्रतियोगिता की ओवरऑल चौम्पीयनशिप विधा भवन स्कूल की रही एवं द्वितीय व तृतीय स्थान एल.ए.एच.एस. एवं भारतीय कर रहा। तैराकी प्रतियोगिता में 10 वर्ष की कैटेगरी में 50 मीटर फ्रीस्टाइल के गु्रप में वीर भारद्वाज प्रथम, आरव गोयल द्वितीय एवं गौरांग तिवारी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी कैटेगरी में गर्ल्स ग्रुप में अविष्का अग्रवाल ने प्रथम, डिम्पल कंवर ने द्वितीय, कामाख्या गुप्ता ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसके ही विभिन्न श्रेणियों में अलग अलग कैटेगरी में आयोजित बॉयज एवं गर्ल्स समूह में प्रतियोगिताएं आयोजित की गई। जिसमें विजयी खिलाडियों को मेडल प्रदान किए गए तथा सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को सर्टिफिकेट दिए गए। 

कब होगी राजनीति में गाली-गलौच अक्षम्य?

' बिहार में वोट चोर,  अभियान के एक मंच से किसी उत्साहीलाल ने प्रधानमंत्री को मां की गाली देकर अच्छा नहीं किया. उस मरदूद को नहीं पता कि कोई भी गाली असभ्यता का परिचायक होती है, और इसे सप्रयास रोका जाना चाहिए. गाली-गलोच से किसी भी अभियान की पवित्रता नष्ट होती है. गाली चाहे आम कार्यकर्त्ता दे या कोई पंत प्रधान इसे निंदनीय ही कहा जाएगा. 

भारतीय राजनीति में गालियों का चलन नया -नया है, कोई एक दशक पुराना. मैने तब भी इस अभियान की निंदा की थी, लेकिन गालियों की जितनी निंदा की गई, उनका प्रचलन उतना ही ज्यादा बढ गया. गालियां दरअसल सबल का अहंकार और निर्बल का हथियार होती हैं. 

हमारे बुंदेलखंड में तो सरस गालियां संस्कृति का अभिन्न अंग है. विवाह के मौके पर महिलाएं यदि बारातियों को लय ताल में गालियां न सुनाएं तो बुरा माना जाता है. बाराती गालियां सुनकर महिलाओं को नेग देते हैं.गालियां वरपक्ष के सगे-संबंधियों को नाम सहित दी जाती थीं.मुझे याद है जब मैं बच्चा था तब अपनी मां को गालियां गाते सुनकर आपे से बाहर हो गया था. लेकिन जब बडा हुआ तो मुझे गालियों का महत्व और लालित्य समझ में आया.

राजनीति में गालियां संस्कृति नहीं बल्कि असभ्यता का परिचायक हैं. इनका श्रीगणेश किसने किया और कब किया ये मैं नहीं बता सकता. किंतु अपनी याददाश्त पर जोर डालता हूं तो लगता है कि राजनीति में गालियां 2014 के पहले चलन में शायद नहीं थीं. तब भी किसी ने श्रीमती इंदिरा गांधी को गाली नहीं दी जब उन्होने इमरजेंसी लगाई या आपरेशन ब्लू स्टार किया. इंदिरा जी को गालियों से नहीं बल्कि गोलियों से मारा गया.

बात प्रधानमंत्री को माँ की गाली देने की है. प्रधानमंत्री का इस गाली से कुछ नहीं बिगडने वाला. वे तो गालियों को शक्तिवर्धक रसायन मानते हैं. वे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उन्हे रोज दो- तीन किलो गालियां मिलती हैं और इनसे उनकी सेहत और अच्छी होती है. प्रधानमंत्री के इस कथन का किसी मूर्ख, अज्ञानी, औघड ने गलत मतलब लगा लिया शायद. लेकिन उस मूढ ने प्रधानमंत्री को मां की गाली देकर विपक्ष के अच्छे - खासे वोट अधिकार अभियान का नुकसान कर दिया. गाली देने वाला किस दल का था ये मायने नही रखता. मायने ये रखता है कि उसने किस मंच से गाली दी.

गाली देने के अपराध के लिए न भादंसं में कोई कडी सजा का प्रावधान था न भारतीय न्याय संहिता में कोई प्रावधान है. गाली देने वाले के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट भी लिख ली है. लेकिन जब तक पुलिस गाली देने वाले को खोजेगी, गिरफ्तार करेगी, आरोप पत्र बनाकर अदालत में दायर करेगी, तब तक बिहार विधानसभा के चुनाव भी हो जाएंगे.

मै कहना चाहता हूँ कि वोट अधिकार यात्रा के मंचों पर भाषण देते समय लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी भी आपा खो रहे हैं. वे प्रधानमंत्री के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं वो भाषा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी फौज के लिए तो ठीक हो सकती है किंतु राहुल के लिए बिल्कुल नहीं. मैने राहुल गांधी के नाना पंडित जवाहरलाल नेहरु को, उनके दादा फिरोज गांधी को, उनकी दादी श्रीमती इंदिरा गांधी को और उनके पिता राजीव गांधी को भाषण देते सुना है और मुझे ये कहने में कोई संकोच नहीं है कि राहुल गांधी ने अपने परिवार की शालीनता से पगी भाषण शैली का इस्तेमाल नहीं किया. वे उत्तेजना में आपा खो रहे हैं.

राहुल गांधी को याद रखना पडेगा कि गाली का जबाब गाली नहीं हो सकती. यदि किसी ने उनकी मां को 'जर्सी गाय ' कहा तो कहा, 'वारवाला' कहा तो कहा,. किसी ने मोदी जी के मुरीद शशि धरूर की पत्नी को 'पांच करोड की गर्लफ्रैड' कहा तो कहा. किसी ने किसी महिला सांसद की हंसी को 'सूर्पणखा की हंसी 'कहा तो जनता ने उन्हे दंडित किया. चार सौ तो छोडिए तीन सौ पार नहीं करने दिया और 240 सीटों पर रोक दिया.

जनता सब कुछ जानती है. कौन घटिया राजनीति कर रहा है,? कौन भाषा की शालीनता भंग कर रहा है? कौन देश की अस्मिता को मिट्टी में मिला रहा है? जनता प्रधानमंत्री को भी सुनती है और लोकसभा में विपक्ष के नेता को भी. सडक पर भी सुनती है और संसद में भी. इसलिए ये एहतियात बरतना बहुत जरूरी है कि "लरजें न कदम, कोई जुबां बेअदब न हो "नेताओं को हर तरह की उत्तेजना से परहेज करना चाहिए. अन्यथा राहुल बाबा आपके सब किए-धरे पर पानी फिर जाएगा, क्योंकि ' मोदी एंड संस ' तो फिलहाल सत्ता छोडने के मूड में नहीं है्.संघ के सरसंघ चालक माननीय डॉ मोहन भागवत भी इसकी ताईद कर चुके हैं.

@राकेश अचल

गुरुवार, 28 अगस्त 2025

मप्र में अब कभी भी पिट सकते हैं कलेक्टर

 डबल इंजन लगाकर चल रहे मप्र में 55 जिलों के कलेक्टर परेशान हैं, इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सूबे में कब, किस जिले के कलेक्टर को सत्तारूढ दल का विधायक पीट दे.भिंड कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने बीजेपी विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा को उंगली दिखाई, तो विधायक ने भी कलेक्टर के मुंह पर मुक्का तान दिया. सुरक्षा बल के जवान यदि बीच में न आते तो कलेक्टर का पिटना तय था.

मप्र मे 2003 से 19 महीनों को छोड भाजपा की ही सरकार है. यानि भाजपा मप्र में दो दशक से सत्तारूढ है. 2018 में कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बेदखल किया था किंतु भाजपा 19 महिने बाद ही बिना चुनाव लडे फिर सत्ता में आ गई थी क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने  भाजपा से सौदेबाजी कर कांग्रेस का तख्ता पलट करा दिया था.

लंबे समय तक सत्ता में रहने के कारण भाजपा के विधायक, सांसद, जिलाध्यक्ष किसी को कुछ समझतै ही नहीं है. जिलों के कलेक्टर और एसपी भाजपा फदाधिकारियों के आगे हाथ बांधे खडे रहते है. इस लंबे समय ने मुख्यमंत्रियों ने प्रशासन प्रमोटी आईएएस और आईपीएस से चलवाने की परंपरा डाल दी. प्रमोटी अधिकारी खेले- खाए होते हैं और उनमें सीधी भर्ती के नौकरशाहों जैसी अकड भी नहीं होती. वे जी हजूरी करने में भी दक्ष होते हैं.इस समय प्रदेश के आधे से ज्यादा जिलों में प्रमोटी अधिकारी कलेक्टर और एसपी हैं. भिंड में स्थिति उल्टी है. इसीलिए यहाँ विधायक ने कलेक्टर पर मुक्का तानने की हिमाकत की.

इससे पहले ग्वालियर में आईएएस निगमायुक्त के साथ भी सत्तारूढ दल के लोग अभद्रता कर चुके है.भिंड विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह अपने समर्थकों के साथ कलेक्टर के बंगले पर पहुंचे थे. पहले विधायक और उनके समर्थक बाहर नारेबाजी करते रहे. फिर विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने समर्थकों के साथ मिलकर कलेक्टर के बंगले के दरवाजे को जोरदार धक्का देकर खोल दिया.

दरवाजा खुलते ही सामने शॉल ओढ़े हुए कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव खड़े नजर आए. विधायक के इस रवैए को देखकर कलेक्टर ने विधायक को उंगली दिखा दी. कलेक्टर की उंगली देखकर विधायक इतना आग बबूला हो गए कि उन्होंने कलेक्टर को मारने के लिए मुक्का तान दिया.इससे पहले कि कलेक्टर और विधायक आपस में उलझते, वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने बीच बचाव कर दिया. लेकिन बात यही नहीं थमी. इस उंगली और मुक्का के बीच कलेक्टर ने विधायक से कह दिया, ''चोरी नहीं चलने दूंगा.'' तो पलटकर विधायक ने कलेक्टर से कहा , ''सबसे बड़ा चोर तो तू है.'' विधायक के यह कहते ही वहां मौजूद विधायक के समर्थकों ने 'भिंड कलेक्टर चोर' है के नारे लगाना शुरू कर दिए.


कलेक्टर और विधायक के बीच बहस बाजी हुई तो, सुरक्षाकर्मियों ने बीच बचाव किया. कलेक्टर को तो बंगले के अंदर कर दिया गया, लेकिन बाहर विधायक ने हंगामा शुरू कर दिया. विधायक के समर्थक जमकर नारेबाजी करते रहे और खुद विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा जमकर अपनी नाराजगी बड़बड़ाते हुए निकालते रहे. 

हंगामे की खबर जैसे ही पुलिस अधिकारियों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों को लगी तो, एडीएम एलके पांडे समेत पुलिस के अन्य अधिकारी कलेक्टर बंगले पर पहुंच गए. यहां विधायक को मनाने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं माने. इसके बाद बात ऊपर तक पहुंची. प्रभारी मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने खुद विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा से बात की. जिसके बाद विधायक का गुस्सा शांत हुआ और विधायक कलेक्टर बंगले से वापस चले गए.कलेक्टर भी शुरू से विवादास्पद है. अदालत ने इनको फील्ड में तैनात न करने की हिदायत दी थी. पूर्व गृहमंत्री डॉ गोविन्द सिंह भी कलेक्टर की शिकायत कर चुके हैं.

मध्यप्रदेश में नौकरशाही और जन प्रतिनिधियों के बीच ये इकलौता मामला नही है. इससे पहले शिवपुरी जिले के भाजपा विधायक प्रीतम लोधी शिवपुरी एसपी  से जूझ चुके हैं. गुना और अशोकनगर में भी टकराव की अनेक घटनाएं हो चुकी हैं. देवास में भाजपा विधायक के बेटे के सामने पुलिस हाथ जोडे खडी रही, जबकि उसने आधी रात को एक मंदिर के दरवाजे खुलवा दिए थे.

मप्र में दरअसल प्रशासन का पूरी तरह से भगवाकरण हो चुका है. ज्यादातर कलेक्टर भाजपा पदाधिकारी की तरह काम कर रहे हैं क्योंकि वे असुरक्षा भाव से घिरे हैं.  सबको पता है कि वक्त पडने पर सरकार नौकरशाही को संरक्षण नहीं देगी,उल्टे उनका तबादला और कर दिया जाएगा.नौकरशाहों को अंधभक्त बनाने का श्रीगणेश तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय शुरू हुआ था. इस परंपरा को उपयोगी मानकर आज के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने भी इसे आगे बढा रहे हैं.

आपको बता दूं कि मध्य प्रदेश में आईएएस के कुल स्वीकृत पद 459 हैं।इनमें से 393 अधिकारी वर्तमान में सेवा में हैं,  66 पद रिक्त हैं।

@ राकेश अचल

बुधवार, 27 अगस्त 2025

अमेरिकी टैरिफ वार का श्रीगणेश, बचाव स्वदेशी से होगा?


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क  का श्रीगणेश आज बुधवार  से लागू हो रहा है। आज से ही देश में श्रीगणेशोत्सव भी आरंभ हो रहा है. भारत अमेरिका के इस आर्थिक हमले का मुकाबला स्वदेशी के नारे के साथ करने जा रहा है. इस हिसाब से ये भारत के लिए इस दशक की कहिए या मोदी युग की शायद पहली और आखिरी अग्नि परीक्षा है.

 आपको बता दूं कि माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के प्रिय मित्र अमेरिका  के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गया कुल टैरिफ 50 फीसदी पर पहुंच गया है, जो दुनिया में किसी भी देश की तुलना में सबसे ज्यादा है।  यह टैरिफ भारत के लगभग 48 अरब डॉलर के निर्यात को प्रभावित करेगा।  अब इसका सबसे ज्यादा असर कपड़ा क्षेत्र पर नजर आ रहा है।  ताजा खबर है कि देश के कई बड़े शहरों में कपड़ा उत्पादन रोक दिया गया है।

 मोदीजी के मित्र ट्रंप साहब अचानक मोदीजी और भारत के शत्रु कैसे बन गए ये हकीकत केवल मोदीजी और डोनाल्ड ट्रंप साहब जानते हैं.ट्रंप ने भारत पर शुरुआत में 25 प्रतिशत शुल्क लगाया था और साथ ही रूसी तेल खरीदने को लेकर जुर्माना भी थोपा था। खास बात है कि भारत के अलावा सिर्फ ब्राजील ही है, जिसपर इतना भारी टैरिफ लगाया गया है।भारत और ब्राजील उस ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य हैं जो अमेरिका की आंख की किरकिरी बना हुआ है.

 फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स के अध्यक्ष एससी राल्हान के मुताबिक , 'बढ़ती लागत प्रतिस्पर्धा के बीच कपड़ा उत्पादकों ने तिरुपुर, नोएडा और सूरत में उत्पादन रोक दिया है। यह क्षेत्र वियतनाम और बांग्लादेश के कम लागत वाले प्रतिद्वंदियों के सामने पिछड़ रहा है। कपडा उद्योग के बाद सबसे बडा संकट सीफूड पर है. सीफूड में खासतौर से झींगा है.अब जब अमेरिका ही भारतीय सीफूड एक्सपोर्ट का करीब 40 फीसदी हिस्सा लेता है तो भंडार में कमी, सप्लाई चेन में परेशानी और किसानों की तकलीफ जैसे कई जोखिम और बढ़ गए हैं।'

अमेरिका के टैरिफ हमले के बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ब्राजील की तरह विरोध का एक शब्द न संसद में बोला और न संसद के बाहर लेकिन राल्हान जैसे लोग बोल उठे हैं. राल्हान ने कहा कि 50 फीसदी टैरिफ से अपने सबसे बड़े निर्यात बाजार में भारतीय सामान पर गंभीर असर होगा। उन्होंने कहा कि इसके चलते अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान को भी भारी झटका लग सकता है। उन्होंने कहा कि चीन, वियतनाम, कंबोडिया, फिलिपींस और दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशियाई देशों की तुलना में भारतीय सामान प्रतिस्पर्धा से बाहर हो गया है।

राल्हान ही नहीं बल्कि कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री ने कहा है कि कपड़ा उत्पादक सरकार की तरफ से राहत मिलने की राह देख रहे हैं। सीआईटीआई अध्यक्ष राकेश मेहरा ने कहा, 'सरकार इंडस्ट्री से बात कर रही है कि कैसे वह इस समय हमारी मदद कर सकती है, लेकिन हालात की गंभीरता के मद्देनजर हम चाहते हैं कि वित्तीय मदद के जरिए मजबूत समर्थ मिले और कच्चे सामान की उपलब्धता के मामले में नीति स्तर पर जल्द फैसले लिए जाएं।'

खबर है कि भारत और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने असैन्य परमाणु सहयोग को मजबूत करने सहित व्यापार और निवेश, महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की है। ‘टू प्लस टू’ अंतरसत्रीय वार्ता के ढांचे के तहत सोमवार को डिजिटल तरीके से हुई वार्ता व्यापार और शुल्क पर ट्रंप प्रशासन की नीतियों को लेकर दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव की पृष्ठभूमि में हुई. लेकिन अभी तक अमेरिका पिघला नहीं है.

जिस दिन भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी सरकार की तरफ 50 फीसद का अतिरिक्त टैक्स लगने वाला है, उस दिन पीएम नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर स्वदेशी और मेक इन इंडिया को आगे बढ़ाने की जोरदार वकालत की है। लेकिन उन्होने ये नहीं बताया कि भारत ने अमेरिका की हेंकडी से निबटने के लिए क्या तैयारी की है. आपको बता दें कि भारत की विदेशनीति का हिंदूकरण करने के फेर में हमारी सरकार गच्चा खा गई और अब प्रधानमंत्री आक्रामक होने के बजाय बचाव की मुद्रा में चीन और रूस की बैशाखियां लगाकर खडे रहने की कोशिश कर रहे हैं. माननीय मोदी जी की ये कोशिश अमेरिका के लिए आग में घी का काम कर रहीं है. इससे संकट कम होने के बजाय और बढने की आशंका है.

पूरा देश मोदीजी की नाकामियों के बावजूद संकट की इस घडी में मोदी जी के स्वदेशी के मंत्र का जाप करना चाहता है लेकिन भारत के बाजार तो चीनी उत्पादों से अटे पडे हैं. स्वदेशी के लिए बाजार में जगह ही कहाँ बची है. भगवान गणेश जी ही अब देश को अमेरिका के इस प्रतिबंधात्मक हमले से बचा सकते हैं.

मजे की बात ये है कि ट्रंप अभी भी मोदी जी के मुरीद हैं.समाचार एजेंसी एएनआई की तरफ जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ के साथ बैठे दिख रहे ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें फोन कर साफ शब्दों में कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका भारत पर ट्रेड बैन और भारी टैरिफ लगाएगा.

@ राकेश अचल

मंगलवार, 26 अगस्त 2025

सिंधिया कन्या विद्यालय में पोलैंड के राजनयिक डॉ. पिओत्र ए. स्वितल्स्की का गरिमामयी आगमन

रविकांत दुबे जिला प्रमुख आपके द्वार न्यूज 


 ग्वालियर ।सिंधिया कन्या विद्यालय में 25 अगस्त  को प्रात: काल *एम्बेसी ऑफ़ द रिपब्लिक ऑफ़ पोलैंड डॉ. पियोत्र ए. स्वितल्स्की, सुश्री मार्ता कुशनिएर्स्का, और श्री अरुणांश गोस्वामी का आगमन हुआ। पियोत्र ए. स्वितल्स्की पूर्व में डेप्युटी फॉरेन मिनिस्टर ऑफ़ पोलैंड ,एम्बेसडर ऑफ़ यूरोपियन यूनियन  टू अर्मेनिआ, परमानेंट रिप्रेजेन्टेटिव ऑफ़ पोलैंड टू द कौंसिल ऑफ़ यूरोप , डायरेक्टर फॉर पालिसी प्लानिंग कौंसिल ऑफ़ यूरोप सेक्रेटेरिएट,डायरेक्टर फॉर पालिसी प्लानिंग एट द पोलिश फॉरेन मिनिस्ट्री फॉर एशिया एंड द डायरेक्टर इन द एम.एफ.ए डिप्लोमेटिक एडवाइजर टू द ओ.एस.सी.ई के  सेक्रेटरी* जनरल रह चुके हैं। मीडिया प्रभारी श्रीमती वैशाली श्रीवास्तव ने बताया कि प्रधानाचार्या श्रीमती निशि मिश्रा द्वारा डॉ. स्वितल्स्की, सुश्री मार्ता कुशनिएर्स्का, और श्री अरुणांश गोस्वामी* का पुष्पगुच्छों से हार्दिक स्वागत किया गया तथा स्मृति चिह्न प्रदान किए गए। इस अवसर पर *कोऑर्डिनेटर के रूप में करियर काउंसलर सुश्री उर्वशी पांडे* विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

 *डॉ. स्वितल्स्की* को विद्यालय परिसर का भ्रमण किया, जिसके दौरान उन्होंने संस्थान की विविध अभिनव पहलों का अवलोकन किया और उनके सामाजिक प्रभाव की सराहना की। प्रमुख पहलों में ‘ *संकल्प* ’—ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने हेतु समर्पित सैनिटरी पैड निर्माण परियोजना को देखा  तथा विद्यालय की छात्राओं के प्रयासों की सरहाना की  इसके उपरांत *डॉ. स्वितल्स्की* ने विद्यालय के *रोबोटिक्स लैब* का भ्रमण किया, जहाँ उन्होंने छात्राओं द्वारा निर्मित रोबोट का अवलोकन किया और उनकी तकनीकी दक्षता व नवाचार क्षमता की सराहना की । इसके बाद उन्होंने वेस्टर्न म्यूज़िक कक्ष  , नृत्य कक्ष ,तबला कक्ष, इंडियन म्यूजिक कक्ष का दौरा किया। *डॉ. स्वितल्स्की* ने छात्राओं की सामूहिक प्रतिभा, रचनात्मकता और सांस्कृतिक समर्पण की सराहना करते हुए विद्यालय की शैक्षिक और सह-पाठ्यक्रमीय उत्कृष्टता की प्रशंसा की। सभी प्रयासों को देखकर *डॉ. स्वितल्स्की ने* विद्यालय की नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और स्थिरता की भावना की सराहना की, जो शिक्षार्थियों को न केवल अकादमिक रूप से, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी समृद्ध बना रही हैं।

   डॉ. स्वितल्स्की ने कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्राओं के साथ इंटरैक्टिव सेशन किया  उन्होंने अपने विशिष्ट करियर के अनुभव से, एक एम्बेसडर के जीवन को परिभाषित करने वाली चुनौतियों और अवसरों के बारे में गहन अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने छात्राओं को उनके अच्छे करियर के लिए प्रेरित किया करियर बनाते समय आने वाली चुनौतियों से आगाह  किया  उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की ।  

 *सत्र का समापन एक रोचक प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ,* जहाँ छात्रों ने उनके अनुभवों और दृष्टिकोणों को और गहराई से समझने के लिए विचारोत्तेजक प्रश्न पूछे। पहला सवाल यह था कि उनकी डिप्लोमा डिग्री में सबसे चुनौतीपूर्ण अनुभव क्या था? उन्होंने उत्तर दिया कि जब नए पोलैंड का जन्म 1999 में हुआ था, तब उन्हें पूरे देश को नए सिरे से डिज़ाइन करना पड़ा।

दूसरा प्रश्न यह था कि भारत और पोलैंड के युवा, दोनों देशों के बीच संबंधों को कैसे मज़बूत कर सकते हैं? उन्होंने इसका उत्तर "एक विश्व, एक परिवार और एक भविष्य" का नारा देकर दिया। उन्होंने कहा कि युवा सबसे अच्छे और सबसे मज़बूत एजेंट होते हैं।

 इस आदान-प्रदान ने छात्राओं को प्रेरित किया और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों तथा एक बेहतर विश्व के निर्माण के बारे में उनकी समझ को व्यापक बनाया। डॉ. पिओत्र *ए. स्वितल्स्की* की यात्रा सिंधिया कन्या विद्यालय के लिए सम्मान की बात थी ।


 

खाटू श्याम मंदिर राधा की हवेली का वार्षिकोत्सव 28 से

रविकांत दुबे जिला प्रमुख आपके द्वार न्यूज

ग्वालियर। खाटू श्याम मंदिर राधा की हवेली बाई साहब की परेड पर मंदिर का 14वां वार्षिक महोत्सव विभिन्न आयोजनों के साथ मनेगा। इस मौके पर श्याम बाबा की रथयात्रा भी निकाली जायेगी। महोत्सव में भारी संख्या में श्याम प्रेमियों की उपस्थिति रहेगी। यह जानकारी मंगलवार को खाटू श्याम मंदिर के मुख्य भक्त राजू रैनवाल व श्याम सरकार उत्सव समिति के गोपाल अग्रवाल ने संयुक्त रूप से पत्रकारवार्ता में दी।

पत्रकारों से चर्चा करते हुये राजू रैनवाल और गोपाल अग्रवाल ने बताया कि 28 अगस्त से 4 सितंबर तक वार्षिक महोत्सव मनेगा। इसकी शोभायात्रा 28 अगस्त को प्रातः 9.30 बजे रोकडिया हनुमान मंदिर से शुरू होगी। इसमें बाबा भोलेनाथ की पालकी भी विशेष आकर्षण का केन्द्र होगी। शोभायात्रा सराफा बाजार, पाटनकर बाजार, दौलतगंज, महाराजबाड़ा, माधवगंज, स्काउट से बाड़ा, जनकगंज, हनुमान चैराहा होते हुये लक्ष्मीगंज से मंदिर स्थल पर पहुंचेगी। यात्रा का जगह जगह श्याम प्रेमी स्वागत भी करेंगे। उन्होंने बताया कि महोत्सव में 29 अगस्त से शिवपुराण कथा का वाचन वृंदावन से पंडितसतीश कौशिक महाराज द्वारा किया जायेगा। कथा के लिये सुबह 9 बजे कलथ यात्रा भी निकलेगी। इस दौरान मंदिर परिसर में एक निशुल्क ज्योतिष शिविर नवग्रह कथावाचक एवं ज्योतिषाचार्य पंडित पंकज कृष्ण शास्त्री द्वारा किया जायेगा।

 3 सितंबर को एकादशी पर मंदिर परिसर में कथा सुनाई जायेगी। वहीं रात्रि को ज्योत कीर्तन स्थानीय कलाकारों द्वारा किया जायेगी। 4 सितंबर को विशाल कीर्तन सायं 7 से सुबह 4 बजे तक होगा। कीर्तन में मुंबई से अधिष्ठा अनुष्का बहनें, वृंदावन से खुशबू राधा एवं जयपुर से आयुष सोमानी के साथ गाजियाबाद से सांवरिया म्यूजिक ग्रुप अपनी प्रस्तुति देंगे। कार्यक्रम की शुरूआत शिरीष गुडडू भैया द्वारा गणेश वंदना के साथ की जायेगी। इसके बाद सबलगढ़ के मंगल बप्पा अपने भजन रखेंगे। पत्रकारवार्ता में श्याम सरकार उत्सव समिति के दिनेश शर्मा, अभिमन्यु चौहान , तरूण बंसल, उमेश गर्ग, संदेश बंसल, शिरीष गुप्ता गुडडू भैया भी उपस्थित थे। 

महाराज को लेकर आचार्य और शंकराचार्य में वाकयुद्ध , ज्ञान को लेकर आपस में उलझे

 



दिग्विजय सिंह का झूठ भी सच और सच भी झूठ है

 

मप्र के पू्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उर्फ़ दिग्गी राजा को सुर्खियों में रहना खूब आता है. इन दिनों जब कांग्रेस हाईकमान मप्र में नये सिरे से संगठन सृजन में लगा है तब खुद को हासिये पर जाता देख दिग्विजय सिंह ने पांच साल पुराना विवादों का गडा मुर्दा उखाडकर खुद को सियासी सुर्खी बना लिया. मुद्दा है पांच साल पहले कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा के दत्तक पुत्र बन चुके ज्योतिरादित्य सिंधिया  और दिग्विजय की भूमिका का.

ग्वालियर के सिंधिया और राघौगढ़ के खीची घराने की अदावत तबकी है जब भारत आजाद नहीं था. तब कांग्रेस भी नहीं थी. राघौगढ में दिग्विजय के पुरखे राज करते थे और ग्वालियर में ज्योतिरादित्य के. चार-पांच पीढी पहले की अदावद मुसलसल जारी है. पुरानी अदावत के दस्तावेजी साक्ष्य हैं लेकिन 1971 से 2025 तक की अदावत का चश्मदीद मैं खुद हूँ. दिग्विजय सिंह ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया से अदावत निभाई और बाद में उनके असमय निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी अदालत निभा रहे हैं. लेकिन दोनों परिवारों के बीच अदावत के बावजूद गजब की  खानदानी शालीनता है.

आप शायद यकीन न करें और मुमकिन है कि अवसर आने पर खुद दिग्विजय सिंह इसे झूठ और बकवास बता दें लेकिन मैने ज्योतिरादित्य की दादी राजमाता के निधन के बाद माधवराव सिंधिया की पगडी रस्म में और  माधवराव सिंधिया के निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया की पगडी रस्म में दिग्विजय सिंह को वे सब रीति रिवाज़ निभाते देखा है जो अब धीरे - धीरे दुर्लभ हो रहे हैं. इनमें एक राजा का एक महाराजा के सामने मुजरा करना और नेग देना शामिल है.

मैने ये उल्लेख इसलिए किया क्योंकि जब भाजपा ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को 2019 के लोकसभा चुनाव में घेरकर हरा दिया गया था तब राघोगढ़ में जश्न मना था. ज्योतिरादित्य चाहते थे कि मप्र से उन्हे पहली प्राथमिकता वाली राज्यसभा सीट से प्रत्याशी बनाया जाए लेकिन दिग्विजय सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ से गठजोड कर ये सीट हडप ली. यदि उनके मन में ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति रत्ती भर भी प्रेम होता तो वे ये सीट लेते ही नहीं. लेकिन कमलनाथ और दिग्विजय सिंह ने मिलकर सिंधिया से पुरानी अदावत भुना कर ही दम लिया स्वर्गीय माधवराव सिंधिया के कांग्रेस में शामिल होने के बाद गांधी परिवार में कमलनाथ की धमक कुछ कम हो गई थी. कमलनाथ संजयगांधी के प्रिय थे और माधवराव राजीव गांधी के प्रिय होने की वजह से नाथ के लिए चुनौती थे.

पिछले दिनों एक निजी समारोह में दर्शक दीर्घा में बैठे दिग्विजय सिंह को हाथ पकडकर मंच तक ले जाने की जो शालीनता केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिखाई वो उतनी ही नकली थी जितना कि दिग्विजय सिंह का महाराज पिता-पुत्र के आगे कोर्निश करना. इसी घटना के बाद दिग्विजय सिंह ने अपने ऊपर लगे खलनायकी के दाग धोने का अभियान शुरू कर दिया. पहले कहा कि ज्योतिरादित्य भले ही भाजपा में हैं लेकिन मेरे पुत्रवत हैं. उनके पिता माधवराव सिंधिया और मैने साथ-साथ काम किया है. दिग्विजय सिंह ने इस घटना के बाद पाडकास्ट और दूसरे संचार माध्यमों के जरिए खुद को सिंधिया की बगावत के लिए जिम्मेदार होने से बचाने के लिए कमलनाथ को भी मोहरा बनाया और ये साबित करने की कोशिश की कि सिंधिया को कांग्रेस छोडने के लिए मजबूर करने के लिए जिम्मेदार वे नही बल्कि कमलनाथ हैं. 

दिग्विजय का कौन सा झूठ सच है और कौन सा सच झूठ है ये पकडना भगवान के बूते की भी बात नहीं है, क्योंकि दिग्गी राजा झूठ को सच और सच को झूठ बनाने में महारत   हासिल राजनीतिज्ञ हैं.

इस पूरे प्रसंग में कमलनाथ ने बहुत संजीदगी का परिचय दिया. उन्होंने दिग्विजय सिंह की बातों का न खंडन किया न समर्थन. उन्होने एक तरह से इस मामले से पल्ला झाड लिया क्योंकि उन्हे पता है कि दिग्विजय सिंह पर आंख बंदकर भरोसा करने से उन्हे कितना नफा, नुक्सान हुआ? छिंदवाड़ा की अजेय लोकसभा सीट भी कमलनाथ को दिग्विजय सिंह का साथ निभाने की वजह से गंवाना पडी, अन्यथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तो उन्हे कोई शिकायत थी ही नहीं.प्रधानमंत्री मोदी से उनका सीधा संपर्क था. 2019 में छिंदवाड़ा लोकसभा से जीते अपने बेटे नकुलननाथ को आशीर्वाद दिलाने कमलनाथ खुद प्रधानमंत्री मोदी के आवास पर गए थे.

लब्बोलुआब ये है कि  नये जमाने की कांग्रेस में न दिग्विजय सिंह का कोई भविष्य है और न कमलनाथ का.ज्योतिरादित्य कांग्रेस छोड ही चुके हैं. फिलहाल उनकी घर वापसी की न कोई जरुरत है और न सूरत फिर भी वे घर वापसी के लिए एक न एक खिडकी खुली रखना चाहते हैं.

बदले मंजर में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से कौन नायक है, कौन खलनायक है तथा कौन अधिनायक है ये तय करना टेढी खीर है. भविष्य में कमलनाथ परिवार भले ही कांग्रेस की राजनीति से दूर चला जाए किंतु राघौगढ का खीची राजघराना और ग्वालियर का सिंधिया राजघराना अपनी राजनीतिक अदावत को जारी रखने के लिए कमर कसकर तैयार है. दिग्विजय सिंह का बेटा राजनीति में एक मंत्री बनकर पैर जमा चुका है और ज्योतिरादित्य का बेटा महाआर्यमन क्रिकेट के रास्ते राजनीति में प्रवेश कर चुका है.खानदानी अदावत की नयी कहानियाँ अभी समाप्त होने वाली नहीं हैं.

=अपनी राय से अवगत अवश्य कराएं.)

@ राकेश अचल

सोमवार, 25 अगस्त 2025

देश में जेपीसी की विश्वसनीयता भी अब संदिग्ध

 

मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और प्रधानमंत्री को 30 दिन की गिरफ्तारी की स्थिति में पद से बर्खास्त करने वाले विधेयकों और संवैधानिक संशोधन पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को विपक्षी दलों ने बड़ा झटका दिया। तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस जेपीसी का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया। टीएमसी का बहिष्कार पहले से तय माना जा रहा था, लेकिन सपा के कदम ने विपक्षी खेमे में हलचल मचा दी है।जेपीसी के बहिष्कार के बाद इन समितियों की विश्वसनीयता पर  प्रश्नचिन्ह लग गया है.

टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने जेपीसी को सिरे से खारिज करते हुए कहा, “मोदी गठबंधन एक असंवैधानिक बिल की जांच के लिए जेपीसी बना रहा है। यह सब एक नाटक है और हमें इसे नाटक ही कहना था। मुझे खुशी है कि हमने यह कदम उठाया है।”

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी टीएमसी का साथ देते हुए कहा, “विधेयक का विचार ही गलत है। जिसने यह बिल पेश किया (गृह मंत्री अमित शाह) उन्होंने खुद कई बार कहा है कि उन पर झूठे केस लगाए गए थे। अगर कोई भी किसी पर फर्जी केस डाल सकता है तो फिर इस बिल का मतलब क्या है?”अब कांग्रेस पर भी विपक्षी एकजुटता के नाम पर दबाव बढ़ रहा है। कांग्रेस अब तक जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में झुकी हुई थी, लेकिन सपा के रुख से पार्टी के भीतर संशय गहरा गया है.

सपा प्रमुख ने विधेयकों को भारत के संघीय ढांचे से टकराने वाला करार दिया। उन्होंने कहा, “जैसे यूपी में हुआ मुख्यमंत्री अपने राज्यों में दर्ज आपराधिक मामले वापस ले सकते हैं। केंद्र का इस पर कोई नियंत्रण नहीं होगा क्योंकि कानून-व्यवस्था राज्य का विषय है। केंद्र सिर्फ उन्हीं मामलों में दखल दे पाएगा जो केंद्रीय एजेंसियों जैसे सीबीआई, ईडी आदि द्वारा दर्ज हों।”

डेरेक ओ’ब्रायन ने जेपीसी की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले इसे जनहित और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक सशक्त तंत्र के रूप में देखा जाता था। उन्होंने कहा, “2014 के बाद से जेपीसी की भूमिका काफी हद तक खोखली हो गई है। सरकारें इसका राजनीतिक इस्तेमाल करने लगी हैं, विपक्ष के संशोधन खारिज किए जाते हैं और बहस महज औपचारिकता बनकर रह गई है।”

विपक्षी दल टीएमसी के बहिष्कार को लेकर पहले से तैयार थे, लेकिन सपा के कदम ने असमंजस पैदा कर दिया है। कई दलों का मानना है कि संसदीय समितियों में हुई बहस अदालत की सुनवाई और जनमत निर्माण में अहम साबित होती है। लेकिन सपा के बहिष्कार ने विपक्ष की सामूहिक आवाज को कमजोर किया है.

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भारत में 2014 से 25 अगस्त 2025 तक  संसद द्वारा गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी)को कुल 10 विधेयक भेजे गए हैं। जेपीसी एक अस्थायी समिति होती है, जो विवादास्पद या जटिल विधेयकों की विस्तृत जांच के लिए दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से सदस्यों के साथ गठित की जाती है। 16वीं लोकसभा (2014-2019) में कुल 133 विधेयक पारित हुए, जिनमें से 25 प्रतिशत को विभिन्न समितियों (जेपीसी सहित) को भेजा गया था। 17वीं लोकसभा (2019-2024) में 16 प्रतिशशत विधेयक समितियों को भेजे गए, जिसमें जेपीसी को 4 विधेयक मिले। 18वीं लोकसभा में अब तक 3 विधेयक जेपीसी को भेजे गए हैं।

विधेयकों की सूची (वर्षानुसार)

भाजपा सरकार बनने के बाद 2014 से 2025 तक जेपीसी को भेजे गए प्रमुख विधेयकों में भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक 2015,नागरिटता संशोधन विधेयक 2016,वित्तीय सुरक्षा हितों को लागू करने और कर्ज वसूली से जुड़ा विधेयक 2016,दिवालिया और दिवालियापन संहिता। जेपीसी ने इसे मजबूत बनाने की सिफारिश की।वित्तीय संकल्प और जमा बीमा विधेयक 2017

व्यक्तिगत डेटा संरक्षणविधेयक 2019। गोपनीयता संबंधी चिंताओं के कारण जेपीसी को भेजा गयाजैव विविधता संशोधन। विधेयक 2021 पर्यावरण विशेषज्ञों की राय लेने के लिए जेपीसी को भेजे गये.

इसके अलावा जन विश्वास संशोधन विधेयक 2022। दंड प्रावधानों को सरल बनाने के लिए बहु-राज्य सहकारी समितियां संशोधन विधेयक  2023। सहकारी क्षेत्र सुधार के लिए।वन संरक्षण संशोधन विधेयक 2023। वन क्षेत्रों के उपयोग पर विवाद के कारणजेपीसी को भेजे गए.

 मौजूदा 18वीं लोकसभा के प्रारंभिक सत्रों में (जून 2024 से अगस्त 2025 तक) तीन और विधेयक जेपीसी को भेजे गए हैं, इनमे- वक्फ संपत्ति सुधार विधेयक 2024 प्रमुख है. इस जेपीसी में जमकर हाथापाई हुई.जेपीसी ने जनवरी 2025 में रिपोर्ट सौंपीऔर सरकार ने कानून भी बना दिया जो अभी सुप्रीम कोर्ट में फैसले का इंतजार कर रहा है. मोदी सरकार ने इसके बावजूद 129 और 130 वां संविधान संशोधन विधेयक, केंद्रीय परिक्षेत्र संशोधन विधेयक 2024भी जेपीसी की झोली में डाल दिया. 'वन नेशन, वन इलेक्शन' विधेयक 2024  जेपीसी  के पास है ही.

 सरकार ने जो ताजा विधेयक जेपीसी को भेजा है वो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को आपराधिक मामलों में जेल जाने पर हटाने से जुड़ा है.

कुल विधेयक 2014 से अब तक लगभग 300 पारित हुए, लेकिन जेपीसी केवल विवादास्पद मामलों में।विशेषज्ञों कहना है कि मोदी सरकार में यूपीए या उससे पहले की सरकारों के मुकाबले जेपीसी का उपयोग कम हुआ क्योंकि अधिकांश विधेयक सीधे पारित या स्टैंडिंग कमेटी को भेजे गए। उदाहरण के लिए सरोगेसी बिल को सेलेक्ट कमेटी भेजा गया, न कि जेपीसी।

 जेपीसी को भेजे गए विधेयक आमतौर पर समिति की रिपोर्ट के बाद संशोधनों के साथ संसद में विचार-विमर्श के लिए लाए जाते हैं। अधिकांश मामलों में, विधेयक पास हो जाते हैं, लेकिन कुछ लैप्स हो जाते हैं या वापस ले लिए जाते हैं। 

जैपसे हिंदू विवाह और विच्छेद विधेयक, 1952 दो साल बाद 1954 में जेपीसी को भेजा गया जो बाद में समिति ने रिपोर्ट आने पर कुछ संशोधनों के साथ 1955 में पास हुआ।विशेष विवाह विधेयक 1952  भी 1954 में जेपीसी को भेजा गया और रिपोर्ट के बाद 1954 में पास हुआ।

सवाल ये है कि सरकार जेपीसी को ढाल बनाने के बजाय विधेयकों पर संसद में खुलकर बहस क्यों नहीं करातीं? सरकार ध्वनिमत से या हंगामें के बीच कोई विधेयक क्यों पारित कराना चाहती हे. विगत 21अगस्त 2025को समाप्त हुए संसद के मानसून सत्र में यही हुआ. 130 वें संविधान संशोधन विधेयक को छोड शेष आधा दर्जन विधेयक हंगामें में बिना बहस के पास करा लिए गये और वे राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून भी बन गये.

@ राकेश अचल

रविवार, 24 अगस्त 2025

अमेरिका में रह रहे भारतीयों पर गाज, भारत से डाक सेवा बंद

 

अगर आपके परिवार का कोई सदस्य अमेरिका में रहता है तो ये खबर आपके लिए ही है. क्योंकि भारतीय डाक विभाग 25 अगस्त, 2025 से अमेरिका के लिए ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय डाक सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर देगा।अमेरिकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के नियमों में कुछ बड़े बदलाव किए हैं जिसकी वजह से भारतीय डाक विभाग को ये अप्रिय कदम उठाने पर मजबूर होना पडा है.

आपको बता दूं कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 30 जुलाई, 2025 को विशेष आदेश जारी किया था। इस आदेश के अनुसार 800 डॉलर तक के सामान पर लगने वाली ड्यूटी (सीमा शुल्क) की छूट खत्म कर दी गई है। पहले, कम कीमत वाले सामान बिना ड्यूटी के अमेरिका में आ जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। आदेश के मुताबिक 29 अगस्त, 2025 से अमेरिका जाने वाले सभी सामानों पर ड्यूटी लगेगी, चाहे उनकी कीमत कुछ भी हो। यह नियम इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमी पावर एक्ट  के तहत लागू होगा। हालांकि, 100 अमेरिकी डॉलर तक के गिफ्ट आइटम पर यह नियम लागू नहीं होगा।

अमेरिकी सरकार के नए नियम के अनुसार, अब ट्रांसपोर्ट कंपनियों और यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन द्वारा मान्यता प्राप्त पार्टियों को अंतरराष्ट्रीय डाक शिपमेंट पर ड्यूटी जमा करनी होगी। 

सीबीपी ने 15 अगस्त, 2025 को कुछ शुरुआती नियम जारी किए थे, लेकिन मान्यता प्राप्त पार्टियों को चुनने और ड्यूटी जमा करने के तरीकों के बारे में पूरी जानकारी अभी तक नहीं दी गई है। इन वजहों से, अमेरिका जाने वाली अंतरराष्ट्रीय मेल को संभालने वाली एयरलाइंस ने 25 अगस्त के बाद डाक कंसाइनमेंट स्वीकार करने में असमर्थता जताई है। उनका कहना है कि वे नए नियमों का पालन करने के लिए तकनीकी और परिचालन रूप से तैयार नहीं हैं।

इसलिए, डाक विभाग 25 अगस्त से अमेरिका जाने वाले सभी प्रकार के अंतरराष्ट्रीय डाक की बुकिंग बंद कर देगा। लेकिन, पत्र/दस्तावेज और 100 अमेरिकी डॉलर तक के गिफ्ट आइटम अभी भेजे जा सकते हैं.

 डाक विभाग ने कहा है कि वह सीबीपी और यूनाइटेड पोस्टल सर्विसेस से और जानकारी मिलने के बाद इन चीजों को अमेरिका भेजेगा। डाक विभाग सभी संबंधित लोगों के साथ मिलकर काम कर रहा है और स्थिति पर नजर रख रहा है। विभाग जल्द से जल्द अमेरिका के लिए पूरी डाक सेवा फिर से शुरू करने की कोशिश कर रहा है।

पीआईबी की  विज्ञप्ति के अनुसार, जिन ग्राहकों ने पहले से ही ऐसे आइटम बुक किए हैं जो अब नए नियमों के अनुसार नहीं भेजे जा सकते, वे डाक शुल्क का रिफंड ले सकते हैं। विभाग ने असुविधा के लिए खेद जताया है और जल्द से जल्द पूरी सेवा बहाल करने की बात कही है.

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में कम से कम 30 लाख भारतीय अलग अलग शहरों में रहते हैं. कुछ छात्र हैं तो कुछ नौकर पेशा हैं. अमेरिका में जन्मै भारतीयों को जोड लिया जाए तो ये संख्या 50 लाख से अधिक हो सकती है. इन भारतीयों के लिए भारत से रोजाना लगभग 11हजार डाक अमेरिका के लिए भेजी जाती हैं. डाक विभाग के फैसले से जहाँ अमेरिका में रहनेवाले लाखों भारतीय परेशान होंगे वहीँ विभाग को भी बडा आर्थिक नुक्सान होगा. कुछ निजी कूरियर कंपनियों से भी डाक भेजी जाती हैं लेकिन ये सेवाएं  बहुत मंहगी हैं.

अमेरिका के टैरिफ वार का शिकार भारत के आम नागरिकों पर पडने वाली ये पहली बडी मार है. इस बारे में भारत और अमेरिका के बीच कोई बातचीत हुई या नहीं इसका कोई विवरण अभी नहीं मिला है.

@ राकेश अचल

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